वासुदेव पाटीदार






ये दोपहर का आलम भी अजीब हैं
तन में भरी सुस्ती भी क्या चीज हैं,
एक तरफ काम का बोझ सताता हैं
दूसरी तरफ मूँछो वाला खडूस बॉस याद आता हैं

शुभ दोपहर ! आपका दिन मंगलमय हो ।





वासुदेव पाटीदार